ममता

डा. रतन कुमारी वर्मा
एसोशिएट प्रोफेसर एवं अध्यक्ष- हिन्दी विभाग
जगत तारन गल्र्स पी.जी. कालेज, इलाहाबाद
 मो0 - 9415050933

नेहा की शादी थी। शादी में सभी लोग इकट्ठा हुए थे। सभी नात-बात एक दूसरे से बतियाने में मशगूल थे। नेहा के मामा ग्राम प्रधान थे। वह बोलेरो गाड़ी से चलते थे। क्षेत्र के विधायक मंत्री से उनके बहुत अच्छे सम्बन्ध थे। उन्होंने विधायक मंत्री जी को भी निमंत्रण दिया था। विधायक जी लखनऊ में बहुत अधिक व्यस्त थे। इसलिए विधायक जी की पत्नी मंत्राइन जी क्षेत्र में विवाह कार्यक्रम में शरीक होने अपने दल-बल के साथ पहुँची। नेहा के मामा मंत्राइन जी की खातिरदारी करने में व्यस्त हो गये। ग्रामीण राजनीति की पारखी कुछ महिलायें भी मंत्राइन जी के साथ लग लीं। वे बड़े सलीके से मंत्राइन जी को वर-वधू के स्टेज पर ले गयीं। इस बीच जयमाल कार्यक्रम सम्पन्न हो चुका था। आशीर्वाद देने की बारी थी। मंत्राइन जी ने हाथ में पुष्प लेकर वर-कन्या को आशीर्वाद दिया। इसके बाद महिलायें मंत्राइन जी को बफर सिस्टम से आयोजित खाने पर ले गयीं। मंत्राइन जी के लिए कई लोग प्लेट लगाने लगे। नेहा के मामा ने सबसे पहले प्लेट लगाकर मंत्राइन जी के हाथ में बढ़ा दिया। मंत्राइन जी ने पकड़ लिया। सबसे पहले खाने की तारीफ कीं फिर राजनीति चर्चा में व्यस्त हो र्गइं। अपने सहयोगी कार्यकर्ताओं को आगे की रणनीति के बारे में समझाने लगीं। एक तरफ विवाह कार्यक्रम सम्पन्न हो रहा था। परिवार के लोग उसमें व्यस्त थे। दूसरी तरफ साथ-साथ राजनीतिक कार्यक्रम भी चल रहा था।

            द्वार पर आई बारात में उस क्षेत्र के पढ़े-लिखे हुए अधिकांश बुद्धिजीवी भी एकत्रित हुए थे। कुछ लोग चारपाई पर बैठे थे तो कुछ लोग कुर्सी पर बैठे थे। सबसे अधिक संख्या मास्टरों की थी। मास्टर राम प्रसाद वर्मा गाँव के प्राथमिक विद्यालय के हेड मास्टर थे। उन्हें गाँव के तथा आस-पास के क्षेत्र के सभी बच्चों के बारे में विस्तृत जानकारी थी। उनकी बच्चों में बहुत अभिरूचि थी। बहुत मन से कक्षा में पढ़ाते थे। समय से विद्यालय लगता था। खूब अच्छी पढ़ाई होती थी। मास्टर राम प्रसाद वर्मा के नाते सभी किसान-मजदूर अपने बचों को खुशी-खुशी विद्यालय भेजते थे। इसलिए सबको उन पर भरोसा था। वे अन्य मास्टरों तथा रिश्तेदारों को बताने लगे कि अबकी बार किसका लड़का इंजीनियरिग में चयनित हुआ है। किसका डाक्टरी में चयनित हआ है। अभी कुछ रिजल्ट आना बाकी है। किसके लड़के के इस बार होने की पूरी उम्मीद है। किसकी लड़की पढ़ने में तेज है। कम्पटीशन की तैयारी कर रही है। सभी बच्चे लखनऊ या इलाहाबाद रहकर तैयारी कर रहे हैं। कुछ लड़के आई0 ए0 एस0 की तैयारी के लिए दिल्ली निकल गये हैं। अब की बार जिले से  कुर्मी बिरादरी के पाँच लड़के आई0 ए0 एस0 की परीक्षा में चयनित हुए हैं। एक लड़की का भी चयन हुआ है। हमारा समाज आगे बढ़ रहा है। सभी लोग ध्यानमग्न होकर मास्टर साहब की बात सुन रहे थे।

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            महिलाओं की मण्डली अपने सुख-दुख की चर्चा में लीन थी। बहुत दिनों के बाद परिवार की सभी लड़कियाँ, बहुएँ, सास सभी लोग इकट्ठा हुई थीं। अड़ोस-पड़ोस की भी महिलाएं आई हुई थीं। सब एक-दूसरे का हाल-चाल पूछ रही थीं। अपने बच्चों की चर्चा कर रही थीं। पड़ोस की बहू नीता देवी की बहन रीता देवी थी। विवाह देखने वह द्वार पर आई हुई थी। बहुत खुश होकर वह नेहा के दुल्हे को निहार रही थी। इतने में नेहा की बुआ मायावती की नजर रीता पर पड़ी। देखते ही तपाक से कहा-भला तुम अपने बच्चों को छोड़कर कैसे बहन के यहाँ पड़ी रहती हो। तुम्हें अपने घर रहना चाहिए। सुना है कि तुम अपनी ससुराल में नहीं रहती हो। रीता देवी से कोई जवाब नहीं देते बना। क्या जवाब थमा दे। मन खौलकर रह गया। थोड़ी देर बाद फिर नेहा की बुआ बोली कि अगर ससुराल में तुम्हारी नहीं पट पाती है तो देवरानी-जेठानी से अलग हिस्सा लेकर रहो। दुनिया अलग रहती है। जब भाईयों में नही पट पाती तो दुनिया अलग होती है। तुम भी अपना हिस्सा लेकर अलग होकर अपने बच्चों के साथ क्यों नहीं रहती हो। भला अपने छः बच्चों को छोड़कर कोई भी माँ मायके में या बहन के यहाँ पड़ी रहती है, घूमती रहती है। तुमसे कैसे रहा जाता है कि आज 10 साल से तुम इसी तरह घूम-घूम कर अपना टाइम काट रही हो।

            रीता देवी को सारी बात खूब समझ में आ रही थीं लेकिन वह नेहा की बुआ का कोई जवाब देना नहीं चाहती थी। रीता को लग रहा था कि ऐसी औरत को क्या जवाब दूँ जो ससुराल जाते ही अपने जेठ एवं सास से अलग होकर अकेले ही अपने बच्चों के साथ जिन्दगी जी रही हो। जिसे  दस बीघे का हिस्सा मिला हुआ हो उसे मेरा दर्द क्या समझ में आयेगा। दर्द को सीने में दबाये हुए रीता हँस-हँसकर अन्य औरतों से बात करने लगी। अपनी बहन नीता की सहेली शीला से बड़े प्रेम से कहने लगी- मैं छः बच्चों की माँ हूँ। क्या बिना किसी वजह के ऐसे ही भाई के यहाँ बैल की तरह काम करती हूँ। बहन के यहाँ रहती हूँ तो बहन के सारे कामों में हाथ बटाती हूँ। खेती थाम लेती हूँ। जहाँ भी मैं रहती हूँ वहीं पर मुझसे सब लोग खुश रहते हैं। सभी लोगों से हँस-बोलकर रहती हूँ। दस साल हो गये। घर की कलह की वजह से पति ने घर छोड़ दिया। कहाँ चले गये, आज तक पता नहीं है। उनके आने की आस लिये मन में जी रही हूँ। बच्चो को पाल रही हूँ। बच्चे सभी छोटे-छोटे हैं। मैं अकेली औरत कमाकर उनका पेट नहीं भर सकती हूँ। केवल पाँच बीघा खेत है। तीन भाईयों का परिवार है। सब लोग बाँटना चाहते हैं। मेरे बच्चों का खर्च सबसे ज्यादा है। मैं ससुराल में पहुँच जाऊँ तो घर बँट जायेगा। सब लोग मेरे बच्चे मुझको पकड़ा देंगे। हमारी सास हमको बहुत मानती है। कहती हैं कि राम आधार हमारा सबसे बड़ा बेटा है। उसने हमारे सभी बच्चों का पार लगाया है। उसने मेरे पाँच बच्चों की पढ़ाई-लिखाई शादी-ब्याह सब कुछ किया। जब उसके बच्चों की बारी आई तो मैं उनको छोड़ दूँ। सास कहती है कि बहू तुम मायके में पड़ी रहो। तुम्हारे बच्चों को मैं देखूँगी। देखती हूँ कैसे नही पढ़ाते-लिखाते और शादी ब्याह करते हैं। सबसे बड़ा बेटा राम उजागिर वर्मा मोतीलाल नेहरू इंजीनियरिंग कालेज इलाहाबाद से बी.टेक कर रहा है। उसने कहा- माँ तुम मामा के यहाँ ही पड़ी रहो। ताकि मजबूर होकर लोग लोक-लाज की परवाह करके मुझे पढ़ाते रहें। नहीं तो माँ तुम मेरा खर्च कहाँ से पूरा कर पाओगी। माँ दो साल बीत गया है। दो साल और इसी तरह से बीत जायेंगे। माँ तुम मेरे खातिर दो साल का वनवास और काट लो। सभी छोटे भाई-बहनों की जिम्मेदारी उठाने के काबिल बन जाउँगा। रीता देवी के कानों में बेटे की ये आवाजें गूँजती हैं। उसी उल्लास में खुश होकर रीता देवी जिन्दगी से लड़े जा रही थी। जिन्दगी से हार मानना नहीं सीखा था रीता ने। वह शीला से बताती है कि मेरे सभी बच्चे मेरी स्थिति को जानते हैं। चुपके से मिलने भी आते हैं पर किसी को बताते नहीं है। स्कूल आने के बहाने आकर मिल जाते हैं।

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            ममता की बेल में लिपटी हुई रीता नेहा के दुल्हे को खिचड़ी खाते देखकर मन ही मन सोच-सोच कर खुश हो रही थी कि एक दिन मेरा भी बेटा इसी तरह मंडप में खिचड़ी खायेगा। महिलायें मंगल गीत गायेंगी। नाच-बाजा आयेगा। बाराती आयेंगे। द्वार सजेगा। लोग मेरे बेटे की मनुहार करेंगे। नौटंकी का नचनिया गाना गाकर नाच रहा था- धूम मचाये रघुराई जनकपुर मे। केथुअन के चार खम्भे गड़े हैं केथुअन माड़व छवाई जनकपुर में। सोनवा के चार खम्भे गड़े है रूपवा के माड़व छवाई जनकपुर में। धूम मचाये रघुराई जनकपुर में।

 

7 COMMENTS

  1. Today, while I was at work, my cousin stole my apple ipad and tested to see if it can survive a 25 foot drop, just so she can be a youtube sensation. My apple ipad is now broken and she has 83 views. I know this is entirely off topic but I had to share it with someone!| Mirella Teodorico Nolita

  2. certainly like your web-site but you need to check the spelling on several of your posts. Many of them are rife with spelling issues and I find it very troublesome to tell the reality nevertheless I will definitely come back again. Matty Aluin Jerz

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