मुल्क की शान (गज़ल)-अनुज पांडेय

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मुल्क की शान (गज़ल)

 

             वे महफूज़ आवाम की जान रखते हैं

             ख़ुद मिटकर मुल्क की शान रखते हैं।

 

            छोड़के आशियाना,आकर सरहद पर

            मां की खिदमत का अरमान रखते हैं।

 

           आएंगे कभी लौटकर, मिलने इक बार

           दोस्तों, परिजनों से वे जुबान रखते हैं।

 

           ख़ुदगरजी को तवज्जो नहीं देते कभी

            मुल्क खातिर हमेशा ईमान रखते हैं।

                  

           घर जाने की इक बार वे भी सोचते हैं

           मगर इस अरमान को बेजान रखते हैं।

 

           मुफ़लिसी जैसी वो जह्मत झेल लेते हैं

        मुल्क की खि़दमत करने का गुमान रखते हैं।

                                       रचनाकार- अनुज पांडेय

 

 

जीवन और मृत्यु

                             ( कविता)

 

विप्लव ने दसवीं की

परीक्षा के लिए

प्राणांतक परिश्रम किया।

मगर परिणाम दुखद आया

वो केवल एक अंक से चूक गया।

 

निराश मन से बोला

” मैंने इतनी मेहनत की,

मगर अनुत्तीर्ण हो गया।

मेरे लिए जीना पाप है।”

 

यह सब कहकर उसने

अपने जीवन का अंत कर लिया

पंखे से लटककर।

 

शायद नहीं जानता था वो

कि नाकामी जीवन का भाग है

संघर्ष ही जीवन।

हाथ पर हाथ धरके बैठ जाना

नाकामी से निराश हो जाना

निराश होकर प्रयत्न छोड़ देना

ये सब मृत्यु समान हैं।

 

 

 

पताग्रामपड़ौली, पोस्ट ककरही, जिलागोरखपुर

आपके उत्तर का इंतजार रहेगा।

मोबाइल नंबर8707065155

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