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साहित्यिक रचनाएँ (कहानी)

ममता [कहानी]-डा. रतन कुमारी वर्मा

नेहा की शादी थी। शादी में सभी लोग इकट्ठा हुए थे। सभी नात-बात एक दूसरे से बतियाने में मशगूल थे। नेहा के मामा ग्राम प्रधान थे। वह बोलेरो गाड़ी से चलते थे। क्षेत्र के विधायक मंत्री से उनके बहुत अच्छे सम्बन्ध थे। उन्होंने विधायक मंत्री जी को भी निमंत्रण दिया था। विधायक जी लखनऊ में बहुत अधिक व्यस्त थे। इसलिए विधायक जी की पत्नी मंत्राइन जी क्षेत्र में विवाह कार्यक्रम में शरीक होने अपने दल-बल के साथ पहुँची। नेहा के मामा मंत्राइन जी की खातिरदारी करने में व्यस्त हो गये। ग्रामीण राजनीति की पारखी कुछ महिलायें भी मंत्राइन जी के साथ लग लीं। वे बड़े सलीके से मंत्राइन जी को वर-वधू के स्टेज पर ले गयीं।

सात फेरों की चुभन-डॉ.वर्षा कुमारी

सात फेरों की चुभन            -डॉ.वर्षा कुमारी जीतू- सृष्टि इतना क्यों रो रही हो? चुप भी हो जाओ अब। तुम...