वरिष्ठ आलोचक, सर्जक विश्वनाथ त्रिपाठी से प्रियंका कुमारी की बातचीत

Please share
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

मकालीन आलोचना जगत् में वरिष्ठ आलोचक विश्वनाथ त्रिपाठी एक महत्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं। एक आलोचक के साथ-साथ आप एक सफल सर्जक, इतिहासकार, गद्यकार एक कुशल अध्यापक और एक अच्छे शिष्य भी रहे हैं । आमतौर पर माना जाता है कि एक सफल आलोचक का सफल सर्जनात्मक लेखक होना या सफल सर्जनात्मक लेखक का सफल आलोचक होना प्रायः संभव नहीं होता लेकिन विश्वनाथ त्रिपाठी ने अपने साहित्य के माध्यम से इस मान्यता को  गलत साबित किया है ।

Read more

उषा गांगुली से साक्षात्कार

Please share
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

उषा गांगुली, जन्म- 1945, जोधपुर आप कोलकाता में रहकर हिंदी रंगकर्म करती हैं। आपने 1976 में ‘रंगकर्मी’नामक अपनी नाट्य –संस्था की स्थापना की। उषा गांगुली द्वारा अभिनीत एवं निर्देशित प्रमुख नाटकों में महाभोज, लोककथा, होली,खोज, वामा, बेटी आई, मय्यत, रुदाली, मुक्ति और काशीनामा इसके अलावा आपने ब्रेख्त के नाटक ‘मदर करेज’ को ‘हिम्मतमाई’ के नाम से निर्देशित एवं स्वयं माँ की भूमिका को निभाया।

Read more

वरिष्ठ व्यंग्यकार और कवि गोपाल चतुर्वेदी से डॉ. संतोष विश्नोई की बातचीत

Please share
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

प्रतिष्ठित व्यंग्यकार और कवि गोपाल चतुर्वेदी जी का नाम वरिष्ठ साहित्यकारों की शृंखला में शीर्षस्थ पर है। आपके दो काव्य-संग्रह -‘कुछ तो है’ और ‘धूप की तलाश’ तथा अनेक व्यंग्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। ‘सारिका’, ‘इंडिया टुडे’, ‘नवभारत टाइम्स’, ‘हिन्दुस्तान’, ‘दैनिक भास्कर’, ‘साहित्य अमृत’ जैसे अनेक पत्र-पत्रिकाओं में आप वर्षों से नियमित लेखन कार्य कर रहे हैं। अब तक आपको अनेक पुरस्कारों से सम्मानित भी किया जा चुका हैं।

Read more