Showing 72 Result(s)

जनकृति मार्च 2021 अंक

  Volume 6, Issue 71, March 2021 ISSN: 2454-2725 (Peer-Reviewed) (विशेषज्ञ समीक्षित) JANKRITI जनकृति Multidisciplinary International Magazin । बहु-विषयक अंतरराष्ट्रीय पत्रिका मार्च 2021 संपादकीय कार्यालय: फ्लैट जी-2, बागेश्वरी अपार्टमेंट, आर्यापुरी, रातू रोड़, रांची, 834001, झारखंड, भारत ईमेल: jankritipatrika@gmail.com वेबसाईट: www.jankriti.com संपर्क: 8805408656 इस पत्रिका में प्रकाशित सामग्री के उपयोग के लिए प्रकाशक से अनुमति आवश्यक …

person sitting on bench in dark room

बंसी कौल : विविधता और अन्विति का अनोखा रंग-संसार-डॉ. प्रोमिला

बंसी कौल की लगभग चार दशक लंबी रंगयात्रा में एक विविधता बनी रहती है। सत्य है कि विविधता का होना अपने आप में उत्कृष्ट होने का मानक नहीं हो सकता पर यदि विविधता रंगकर्मी के निरंतर विकास और अपने आपको, अपने रंगलोक को लगातार सार्थक रूप से पुनः परिभाषित करते चलने से आती है तो यह प्रस्तुतियों को संपन्नता देती है।

people watching concert during nighttime

भारतीय रंगमंच में स्त्रियों का प्रवेश-स्वाति मौर्या

रंगमंच के इतिहास को देखने पर यही मिलता है कि प्राचीन काल से लेकर आधुनिक काल के शुरुआती कुछ वर्षों तक स्त्रियों की भूमिका भी स्वयं पुरुष ही करते थे। जबकि भारत देश में हमेशा से ही विदुषी महिलाएं होती रही हैं जो विभिन्न क्षेत्रों में अपना परचम लहरा रही थी। लेकिन यह विचारणीय प्रश्न है कि इतनी उन्नति परम्परा के रहते हुए भी रंगमंच में स्त्रियों की भूमिका पुरुष ही क्यों करते थे ? वैदिक काल से ही प्रत्येक क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली स्त्रियों को मंचन के क्षेत्र में प्रवेश मिलने में इतना संघर्ष क्यों करना पड़ा ?

jankriti

अनुवादक के रूप में निर्मल वर्मा का मूल्यांकन-रज्जन प्रसाद शुक्ला

निर्मल वर्मा ऐसे कथाकार रहे है, जिन्होंने अपने लेखन को देश-विदेश के संदर्भ, इतिहास, पुराणों के साक्ष्यों एवं सत्यों से गुफ़ित करने का प्रयत्न किया है। उन्होंने देश-विदेश के लेखकों की रचनाओं का साक्ष्य भी पर्याप्त मात्रा में लिया है। विशेषकर उन विदेशी लेखकों को उन्होंने जगह-जगह रेखांकित किया है, जिन्होंने इतिहास बोध के गहरे धरातल पर जाकर अपने वर्तमान को आने वाली पीढ़ियों के लिए रोशनी की तरह निर्मित किया है।

JANKRITI- Vol. 6, Issue 69-70, Jan-Feb 2021

जनवरी-फरवरी 2021 सयुंक्त अंक में प्रकाशित सामग्री को आप यहाँ देख सकते हैं साथ ही प्रत्येक सामग्री की पीडीएफ कॉपी भी डाउनलोड कर सकते हैं- 

photography of tall trees at daytime

एक माँ के अस्तित्त्व की खोज : ‘1084वें की माँ ’

महाश्वेता देवी लिखित ‘1084वें की माँ’ उपन्यास 70 के दशक के बंगाल के सामाजिक एवं राजनीतिक माहौल को दर्शाता है । उस वक्त नक्सलवाद अपने चरमसीमा पर था । छात्रों, गरीबों और आम जनता में अपनी सरकार को लेकर भयंकर असंतोष फैला हुआ था ।

green wooden window painting

अकबर की धार्मिक नीति-जुगनू आरा

अकबर प्रथम शासक था जिसने शासन के आरम्भ से ही धीरे-धीरे सभी धर्मो और आध्यात्मिक आन्दोलनों के प्रति प्रगतिशील उदारता और सक्रिय सहानुभूति की नीति को अपनाया। है।

red white and green color pencils

मुंशी ज़का उल्लाह और डिप्टी नज़ीर अहमद के शैक्षिक कार्य-अब्दुल अहद

दिल्ली के 19 वीं शताब्दी के दो महत्वपूर्ण विद्वान मुंशी जका अल्लाह (1832-1910) और डिप्टी नज़ीर अहमद(1830-1912) के शैक्षिक प्रयासों का उल्लेख किया जाएगा। इसके अन्तर्गत हम देखेंगे कि उनके यह प्रयास किस तरह अंग्रेजों व सर सय्येद के प्रयासों से अलग थे और उनके द्वारा यह शैक्षिक कार्य क्यों अंजाम दिए जा रहे थे।

hills covered with green plants ]

असम का सांस्कृतिक पर्यटन : अनुवाद और निर्वचन की वर्तमान स्थिति एवं समस्याएँ-उज्जवल डेका बरुआ

पर्यटन स्थलों पर अनुवादक एवं निर्वचक की आवश्यकता होती है। अनुवाद से आशय भाषांतरण की क्रिया से है। इसके सहारे अनुवादक सूचनाओं को सही-सही पर्यटकों की भाषा में उन तक संप्रेषित करता है।

error: कॉपी नहीं शेयर करें!!