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बंसी कौल : विविधता और अन्विति का अनोखा रंग-संसार-डॉ. प्रोमिला

बंसी कौल की लगभग चार दशक लंबी रंगयात्रा में एक विविधता बनी रहती है। सत्य है कि विविधता का होना अपने आप में उत्कृष्ट होने का मानक नहीं हो सकता पर यदि विविधता रंगकर्मी के निरंतर विकास और अपने आपको, अपने रंगलोक को लगातार सार्थक रूप से पुनः परिभाषित करते चलने से आती है तो यह प्रस्तुतियों को संपन्नता देती है।

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अनुवादक के रूप में निर्मल वर्मा का मूल्यांकन-रज्जन प्रसाद शुक्ला

निर्मल वर्मा ऐसे कथाकार रहे है, जिन्होंने अपने लेखन को देश-विदेश के संदर्भ, इतिहास, पुराणों के साक्ष्यों एवं सत्यों से गुफ़ित करने का प्रयत्न किया है। उन्होंने देश-विदेश के लेखकों की रचनाओं का साक्ष्य भी पर्याप्त मात्रा में लिया है। विशेषकर उन विदेशी लेखकों को उन्होंने जगह-जगह रेखांकित किया है, जिन्होंने इतिहास बोध के गहरे धरातल पर जाकर अपने वर्तमान को आने वाली पीढ़ियों के लिए रोशनी की तरह निर्मित किया है।

JANKRITI- Vol. 6, Issue 69-70, Jan-Feb 2021

जनवरी-फरवरी 2021 सयुंक्त अंक में प्रकाशित सामग्री को आप यहाँ देख सकते हैं साथ ही प्रत्येक सामग्री की पीडीएफ कॉपी भी डाउनलोड कर सकते हैं- 

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