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Volume 6, Issue 63, July 2020

उषा गांगुली से साक्षात्कार

उषा गांगुली, जन्म- 1945, जोधपुर आप कोलकाता में रहकर हिंदी रंगकर्म करती हैं। आपने 1976 में ‘रंगकर्मी’नामक अपनी नाट्य –संस्था की स्थापना की। उषा गांगुली द्वारा अभिनीत एवं निर्देशित प्रमुख नाटकों में महाभोज, लोककथा, होली,खोज, वामा, बेटी आई, मय्यत, रुदाली, मुक्ति और काशीनामा इसके अलावा आपने ब्रेख्त के नाटक ‘मदर करेज’ को ‘हिम्मतमाई’ के नाम से निर्देशित एवं स्वयं माँ की भूमिका को निभाया।

वरिष्ठ व्यंग्यकार और कवि गोपाल चतुर्वेदी से डॉ. संतोष विश्नोई की...

प्रतिष्ठित व्यंग्यकार और कवि गोपाल चतुर्वेदी जी का नाम वरिष्ठ साहित्यकारों की शृंखला में शीर्षस्थ पर है। आपके दो काव्य-संग्रह -‘कुछ तो है’ और ‘धूप की तलाश’ तथा अनेक व्यंग्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। ‘सारिका’, ‘इंडिया टुडे’, ‘नवभारत टाइम्स’, ‘हिन्दुस्तान’, ‘दैनिक भास्कर’, ‘साहित्य अमृत’ जैसे अनेक पत्र-पत्रिकाओं में आप वर्षों से नियमित लेखन कार्य कर रहे हैं। अब तक आपको अनेक पुरस्कारों से सम्मानित भी किया जा चुका हैं।

अरुणाचल की लोक संस्कृति (अरुणाचल प्रदेश के त्यौहारों के विशेष संदर्भ...

अरुणाचल की लोक संस्कृति (अरुणाचल प्रदेश के त्यौहारों के विशेष संदर्भ में) मदालसा मणि त्रिपाठीशोधार्थी, हिंदी विभाग,राजीव गाँधी विश्वविद्यालयदोइमुख, ईटानगर भारत के...

भारतीय लोक साहित्य में पर्यावरण: विकास कुमार गुप्ता

भारतीय लोक साहित्य में पर्यावरण विकास कुमार गुप्ता होजाई, असम पिन-782435 Vikashg891@gmail.com 9854716533 आदि काल से ही नहीं बल्कि युगो-युगो से है और यह...

हरसिल गाँव और  महापंडित  राहुल सांस्कृत्यायन की कुटिया:-संतोष बंसल

हरसिल गाँव और  महापंडित  राहुल सांस्कृत्यायन की कुटिया -संतोष बंसल उत्तरकाशी में कंक्रीट के मलबे को देख मन में उस प्रलय...

संस्मरण-बहादुर:उर्मिला शर्मा

संस्मरण बहादुर उर्मिला शर्मा,सहायक प्राध्यापक,अन्नदा महाविद्यालय,हजारीबाग (झारखंड)              जब से ब्याहकर आई, तब से इस परिवार में मैनें बहादुर को एक सेवक...

मुल्क की शान (गज़ल)-अनुज पांडेय

मुल्क की शान (गज़ल)                वे महफूज़ आवाम की जान रखते हैं              ख़ुद मिटकर मुल्क की शान रखते हैं।               छोड़के...

आत्मनिर्भर-दिलीप तेतरवे

आत्मनिर्भर -दिलीप तेतरवे घोषणा सुनते ही रामा स्वावलम्बी चेरियन ने कहा- मुझे भी आत्मनिर्भर बनना है। वह बीते हुए दिनों की...

हास्य व्यंग्य लेख-तुम कब जाओगी कोरोना !: नरेन्द्र कुमार कुलमित्र

हास्य व्यंग्य लेख तुम कब जाओगी कोरोना !   -नरेन्द्र कुमार कुलमित्र कल मैं अपने गाँव के एक मित्र से फोन पर...

लघुकथा – झूठे रिश्ते: मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

लघुकथा - झूठे रिश्ते - मुकेश कुमार ऋषि वर्मा देर शाम तक मौसम रौद्ररुप दिखाता रहा। ओलों भरी बरसात ने मई...