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उषा गांगुली से साक्षात्कार

उषा गांगुली, जन्म- 1945, जोधपुर आप कोलकाता में रहकर हिंदी रंगकर्म करती हैं। आपने 1976 में ‘रंगकर्मी’नामक अपनी नाट्य –संस्था की स्थापना की। उषा गांगुली द्वारा अभिनीत एवं निर्देशित प्रमुख नाटकों में महाभोज, लोककथा, होली,खोज, वामा, बेटी आई, मय्यत, रुदाली, मुक्ति और काशीनामा इसके अलावा आपने ब्रेख्त के नाटक ‘मदर करेज’ को ‘हिम्मतमाई’ के नाम से निर्देशित एवं स्वयं माँ की भूमिका को निभाया।

वरिष्ठ व्यंग्यकार और कवि गोपाल चतुर्वेदी से डॉ. संतोष विश्नोई की बातचीत

प्रतिष्ठित व्यंग्यकार और कवि गोपाल चतुर्वेदी जी का नाम वरिष्ठ साहित्यकारों की शृंखला में शीर्षस्थ पर है। आपके दो काव्य-संग्रह -‘कुछ तो है’ और ‘धूप की तलाश’ तथा अनेक व्यंग्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। ‘सारिका’, ‘इंडिया टुडे’, ‘नवभारत टाइम्स’, ‘हिन्दुस्तान’, ‘दैनिक भास्कर’, ‘साहित्य अमृत’ जैसे अनेक पत्र-पत्रिकाओं में आप वर्षों से नियमित लेखन कार्य कर रहे हैं। अब तक आपको अनेक पुरस्कारों से सम्मानित भी किया जा चुका हैं।

अरुणाचल की लोक संस्कृति (अरुणाचल प्रदेश के त्यौहारों के विशेष संदर्भ में) :

अरुणाचल की लोक संस्कृति (अरुणाचल प्रदेश के त्यौहारों के विशेष संदर्भ में) मदालसा मणि त्रिपाठीशोधार्थी, हिंदी विभाग,राजीव गाँधी विश्वविद्यालयदोइमुख, ईटानगर भारत के पूर्व  एवं पूर्वोत्तर, प्राकृतिक बुनावट के कारण उसका  न केवल अभिन्न भाग है बल्कि भारत की समृद्धि में उसकी भूमिका बहुआयामी है । उत्तरपूर्व की भाषाओं की विविधता ही नहीं, बल्कि लोक संस्कृतियों …

भारतीय लोक साहित्य में पर्यावरण: विकास कुमार गुप्ता

भारतीय लोक साहित्य में पर्यावरण विकास कुमार गुप्ता होजाई, असम पिन-782435 Vikashg891@gmail.com 9854716533 आदि काल से ही नहीं बल्कि युगो-युगो से है और यह एक दूसरे के पूरक हैं । इन दोनों का संबंध सदियों से स्थापित है और दिनों दिन यह और भी विस्तार होते जा रहे हैं । इसमें कोई संदेह नहीं है …

हरसिल गाँव और  महापंडित  राहुल सांस्कृत्यायन की कुटिया:-संतोष बंसल

हरसिल गाँव और  महापंडित  राहुल सांस्कृत्यायन की कुटिया –संतोष बंसल उत्तरकाशी में कंक्रीट के मलबे को देख मन में उस प्रलय का बिम्ब बार बार उभर रहा था और यही ख्याल आ रहा था कि पहाड़ों की खूबसूरत दुनिया को इंसान अपने ही हाथो उजाड़ रहा है। इस कटु चित्र को लिए हम बस से …

संस्मरण-बहादुर:उर्मिला शर्मा

संस्मरण बहादुर उर्मिला शर्मा,सहायक प्राध्यापक,अन्नदा महाविद्यालय,हजारीबाग (झारखंड)              जब से ब्याहकर आई, तब से इस परिवार में मैनें बहादुर को एक सेवक के रूप में काम करते देखा । लंबा कद, मध्यम रंग, मध्यम तीखी नाक , अपेक्षाकृत छोटी आँखें व सपाट चेहरा। उम्र कोई पैंतीस के आसपास । अत्यंत सरलमना। यानि कि कुल मिलाकर …

मुल्क की शान (गज़ल)-अनुज पांडेय

मुल्क की शान (गज़ल)                वे महफूज़ आवाम की जान रखते हैं              ख़ुद मिटकर मुल्क की शान रखते हैं।               छोड़के आशियाना,आकर सरहद पर             मां की खिदमत का अरमान रखते हैं।              आएंगे कभी लौटकर, मिलने इक बार            दोस्तों, परिजनों से वे जुबान रखते हैं।              ख़ुदगरजी को …

आत्मनिर्भर-दिलीप तेतरवे

आत्मनिर्भर –दिलीप तेतरवे घोषणा सुनते ही रामा स्वावलम्बी चेरियन ने कहा- मुझे भी आत्मनिर्भर बनना है। वह बीते हुए दिनों की घटनाओं पर सोचने लगा, जिनका सम्बन्ध उससे, उसके गाँव और उसके देश से था-      -पिछली बार हमारे विधायक तांडेश्वरम् जी आए थे, हमारे गाँव को आत्मनिर्भर बनाने के लिए। थाना बनवा गए। सत्तर …

हास्य व्यंग्य लेख-तुम कब जाओगी कोरोना !: नरेन्द्र कुमार कुलमित्र

हास्य व्यंग्य लेख तुम कब जाओगी कोरोना !   –नरेन्द्र कुमार कुलमित्र कल मैं अपने गाँव के एक मित्र से फोन पर बात कर रहा था तभी उसने मुझे सुझाव दिया कि’मित्र आप केवल कविता लिखते हो कभी गद्य की विधा लेख आदि क्यों नहीं लिखते ? उनकी बातों से मैं जोश में आ गया …

लघुकथा – झूठे रिश्ते: मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

लघुकथा – झूठे रिश्ते – मुकेश कुमार ऋषि वर्मा देर शाम तक मौसम रौद्ररुप दिखाता रहा। ओलों भरी बरसात ने मई के महीने को जनवरी जैसा ठण्डा बना दिया था। मौसम के इस बदलाव को रामेश्वर सहन नहीं कर पाये। रात बारह-एक बजे के बीच उनकी तबियत एकदम से बिगड़ गई। सर्दी-जुकाम ने उनके गले …

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