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Painting of Stonehenge

चांद का मुंह टेढ़ा है: नये परिप्रेक्ष्य में-अमित कुमार

चांद का मुंह टेढ़ा है’ को नये परिप्रेक्ष्य में देखना इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि उत्तर आधुनिक विमर्शों के इस दौर में जहाँ स्त्री, दलित, आदिवासी और जेंडर के सवाल खास संदर्भ में अपनी उदात्त उपस्थिति दर्ज करा रहें हों वहाँ इन हाशिये के समाज के प्रति मुक्तिबोध का दृष्टिकोण उनका नजरिया क्या था?

black and white abstract painting

कलि कथा वाया बाइपास में भूमंडलीकरण का प्रभाव एवं प्रतिरोध

समकालीन हिंदी कथाकारों में अलका सरावगी की ख़ास पहचान है। अपनी ख़ास सृजनधर्मिता के कारण उन्हें हिन्दी साहित्यिक जगत में विशिष्ट स्थान प्राप्त है। अलका सरावगी का प्रथम एवं चर्चित उपन्यास है ‘कलिकथा वाया बाइपास’।

photography of tall trees at daytime

एक माँ के अस्तित्त्व की खोज : ‘1084वें की माँ ’

महाश्वेता देवी लिखित ‘1084वें की माँ’ उपन्यास 70 के दशक के बंगाल के सामाजिक एवं राजनीतिक माहौल को दर्शाता है । उस वक्त नक्सलवाद अपने चरमसीमा पर था । छात्रों, गरीबों और आम जनता में अपनी सरकार को लेकर भयंकर असंतोष फैला हुआ था ।

wallet on top of map

हिन्दी यात्रा साहित्य में रामवृक्ष बेनीपुरी

यात्रा वृतांत लेखन हिन्दी साहित्य की एक महत्वपूर्ण विधा है, जिसके माध्यम से विभिन्न साहित्यकारों ने अपने यायावरी अनुभवों को लिपिबद्ध किया है। रामवृक्ष बेनीपुरी ने अपनी दो योरोपीय यात्राओं को बहुत ही रोचक एवं प्रभावी सम्प्रेषणीयता के साथ अपने यात्रा ग्रन्थों में उल्लेखित किया है।

white and purple flower illustration

कविता का वर्तमान एवं औपनिवेशिकता

रतीय सांस्कृतिक मूल्यों के स्खलन, भाषा, रहन-सहन, विचार-पद्धति, जीवन-शैली, वेशभूषा, शिक्षा और जीवन-मूल्यों में जो अवांछित विद्रूपताएँ आई हैं, उन्हें समकालीन हिन्दी कविता ने पहचाना है।

multicolored cyclops painting

समकालीन हिंदी कविता का वर्तमान परिदृश्य

समकालीन कविता में सामाजिक बोध को समय की माँगों के अनुरूप उभरते हुए देखा जा सकता है जिसने मनुष्य को उसके दायित्वों के प्रति बोध कराया। समकालीन कविता की प्रमुख विशेषता जनपक्षधरता रही है।

pencil on opened notebook

समय के संदर्भ को दर्ज करता डायरी का गद्य

माज में व्यक्ति की महत्ता के साथ ही साहित्य में इस कथेतर गद्य की प्रतिष्ठा बढ़ती गयी और यह आत्म विज्ञापन से अलग लेखक के जीवन संघर्ष और सांस्कृतिक संवाद को प्रकट करने वाली विधा के रूप में स्थापित होती गयी. मोहन राकेश एक साहित्यकार थे लेकिन उनकी लिखी हुई डायरी मात्र ‘एक साहित्यिक की डायरी’ नहीं कही जा सकती.

white concrete building under white clouds during daytime

स्वामी विवेकानंद : जीवन और संदेश

प्रस्तुत शोध आलेख में स्वामी विवेकानंद का संदेश क्या है? आधुनिक युग जीवन में उनके प्रेरक व्यक्तित्त्व और जीवन के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन-विश्‍लेषण किया गया है।

हिंदी की आरम्भिक आलोचना का विकास (तुलनात्मक आलोचना के विशेष संदर्भ में )

इस लेख में हिंदी की इसी आरम्भिक तुलनात्मक आलोचना के स्वरूप, बहसों, एक-दूसरे रचनाकार को बड़ा दिखने की प्रतिस्पर्धा और तुलनात्मक आलोचना के विकसित होने के कारण हिंदी आलोचना में आयी गिरावट को दिखाया गया है।

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