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Literature Discourse साहित्यिक –विमर्श

green and red flower painting

श्रृंखला की कड़ियाँ में निहित स्त्री-चेतना-डॉ. चैताली सिन्हा

हिन्दी नवजागरण की महत्वपूर्ण लेखिका, कवयित्री, समाज सेविका, सशक्त वक्ता, संपादिका, दार्शनिक एवं आध्यात्मिक कृतियों से मानवीय दृष्टिकोण को प्रज्वलित करनेवाली चित्रकार महादेवी वर्मा की यह पुस्तक ‘श्रृंखला की कड़ियाँ’ आधुनिक स्त्री-अस्मिता को अभिव्यक्त करने में मील का पत्थर सिद्ध हुई है।
closeup photo of person's hand

दारगे नरबू : शव काटने वाला आदमी-विजय कुमार

भारतवर्ष के पूर्वोत्तर में बसने वाली ‘मनपा’ जनजाति में शव को न दफनाया जाता है और न ही उसे जलाया जाता है बल्कि यह जनजाति शव को 108 टुकड़ों में काट कर नदी में प्रवाहित कर अंत्येष्टि का कार्य सम्पन्न करती है।
gray scale photo of man statue

साहित्य और कला के अध्ययन में मार्क्सवाद का महत्त्व-अनीता

मार्क्सवाद के साहित्य और कला-संबंधी विचार इनकी (मार्क्स और एंजिल्स से) पुस्तक ‘लिटरेचर एण्ड आर्ट’ मे है, जो इनके ‘ए कण्ट्रीब्यूशन टु दि क्रिटिक ऑफ़ पोलिटिकलइकोनामी नामक ग्रंथ की प्रस्तावना का अंश है
mans face concrete statue

साहित्य के समाजशास्त्र की दृष्टि से मार्क्सवाद की उपयोगिता-रमन कुमार

साहित्य, समाजशास्त्र और मार्क्सवाद तीनों समाज में अपना स्वतंत्र रूप निर्धारित करते हैं, किन्तु यह भी एक सत्य है कि समाज के बिना साहित्य का और साहित्य के बिना समाज का वजूद नाम मात्र होगा।
multicolored houses

हिन्दी ग़ज़ल में फ़िक्र और ज़िक्र -डा. जियाउर रहमान जाफरी

हिंदी ग़ज़ल की स्थिति और बेहतर होती अगर वह अभिमान, आत्म प्रशंसा, अहंकार और गुट बंदे का शिकार न हो गई होती. हिंदी का हर दो में से एक ग़ज़ल कार अपने को श्रेष्ठ और दूसरे की ग़ज़लों का अवमूल्यन करने में लगा हुआ है.
people standing near house

फणीश्वरनाथ रेणु की ‘जलवा’ कहानी में देशप्रेम-डॉ० पवनेश ठकुराठी

फणीश्वरनाथ रेणु ने कहानी लेखन की शुरुआत 1936 ई० के आसपास की। उस समय इनकी कुछ कहानियाँ प्रकाशित भी हुई थीं, किंतु वे किशोर रेणु की अपरिपक्व कहानियाँ थीं। 1942 के आंदोलन में गिरफ़्तार होने के बाद जब वे 1944 में जेल से मुक्त हुए, तब घर लौटने पर रेणु जी ने 'बटबाबा' नामक पहली परिपक्व कहानी लिखी।
brown wooden house on green grass field near green trees during daytime

दीर्घतपा : एक विश्लेषणात्मक अध्ययन-शेषांक चौधरी

प्रस्तुत उपन्यास ‘दीर्घतपा’ कुमारी बेला गुप्त के ह्रदय के यथार्थ रूप की पहचान प्रकट करता है। जीवन और संसार की मंगलकामना से प्रेरित होकर बेला गुप्त ने अपना संपूर्ण जीवन समाज की सेवा में अर्पित कर दिया है। बेला के माध्यम से लेखक ने यह पूछना चाहा है कि क्या यही वह आजादी है जिसके लिए अनगिनत लोगों ने जेलें काटीं और अपने प्राणों की आहुति दी ?
assorted-title book lot

19वीं शताब्दी में हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन में भाषा संबंधी...

20वीं सदी के बाद इस दृष्टिकोण से भाषाओं का आकलन शुरू हुआ। डॉ.रामविलास शर्मा ने 19वीं सदी की भाषा को हिन्दी की सहोदरी भाषा का दर्जा प्रदान किया है। राम विलास शर्मा ने खड़ी बोली का पक्ष लेते हुए इसे 10वीं सदी के करीब से ही बोलचाल की भाषा सिद्ध करने का प्रयास किया है। भाषा और समाज पुस्तक में वे लिखते हैं- “खड़ी बोली मुसलमानों के आने से पहले भी थी, उनके शासन काल में भी रही और आज भी है।
Painting of Stonehenge

चांद का मुंह टेढ़ा है: नये परिप्रेक्ष्य में-अमित कुमार

चांद का मुंह टेढ़ा है’ को नये परिप्रेक्ष्य में देखना इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि उत्तर आधुनिक विमर्शों के इस दौर में जहाँ स्त्री, दलित, आदिवासी और जेंडर के सवाल खास संदर्भ में अपनी उदात्त उपस्थिति दर्ज करा रहें हों वहाँ इन हाशिये के समाज के प्रति मुक्तिबोध का दृष्टिकोण उनका नजरिया क्या था?
black and white abstract painting

कलि कथा वाया बाइपास में भूमंडलीकरण का प्रभाव एवं प्रतिरोध

समकालीन हिंदी कथाकारों में अलका सरावगी की ख़ास पहचान है। अपनी ख़ास सृजनधर्मिता के कारण उन्हें हिन्दी साहित्यिक जगत में विशिष्ट स्थान प्राप्त है। अलका सरावगी का प्रथम एवं चर्चित उपन्यास है ‘कलिकथा वाया बाइपास’।