तेजेन्द्र शर्मा की कहानी खिड़की के अंदर-बाहर झांकती वृद्ध मनोस्थिति

मधु मेहता साथी

वर्तमान कहानी परिदृश्य में तेजेन्द्र शर्मा की कहानियां जिंदगी के उतार-चढ़ावों को बहुत ही बारीकी से चित्रित करती हैं। आज की आप धापी में युवा वर्ग अपने आप मे बहुत ही ज्यादा व्यस्त हो गया है।आज के युवा को बुज़ुर्गएक बोझ सा लगने लगे हैं। युवा पीढ़ी एकल परिवारमें विश्वास करने लगी है और बुजुर्ग अपनी आप को उपेक्षित महसूस करने लगे हैं।

तेजेन्द्र शर्मा की कहानी‘खिड़की’ इस उपेक्षित भावना का चित्रण करते हुएसमाज के वरिष्ठ नागरिकों को जीने के लिये एक नयी आशा प्रदान करती है। आधुनिक हिंदी कथा साहित्य में प्रवासी कथाकार के रूप में तेजेन्द्र शर्मा जी का नाम आता है। तेजेन्द्र शर्मा यू.के. में रहकर हिंदी कथा साहित्य के प्रहरी के रूप में हिंदी के विकास के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने ब्रिटेन के परिवेश, स्थितियों, रहन-सहन वहां के चाल चलन और सामाजिक परिवेश को ध्यान में रखते हुए हिन्दी साहित्य को नये थीम की कहानियां दी हैं। इनकी बहुत सी कहानियों में भारत की मिट्टी की सौंधी सुगंध से लेकर भारत की संस्कृति, सभ्यता परम्परा आदि भी मौजूद हैं।

तेजेन्द्र शर्मा ने अपनी कहानियों में बहुत सारे प्रयोग किये हैं तथा इनकी कहानियों में ‘रिश्तों’ का स्वर प्रमुख रहा है। उन्होंने अपनी कहानियों में ब्रिटेन में रहकर भी भारतीय सरजमीं पर पनप रहे विभिन्न रिश्तों को अपनी कहानियों में बड़े चाव से प्रस्तुत किया है। तेजेन्द्र की कहानियों में दुलर्भ सहजताएं हैं इसके कारण ही पाठक उनके पात्रें से सहानुभूति पूर्वक जुड़ जाता है इनकी हर कहानी में नया विषय और नयी थीम होती हैं। कहानियों में नयेपन की ललक तो है ही साथ ही मृत्युबोध स्त्री विमर्श और मानवीय संवेदनाओं का स्थायी भाव मूल स्वर है।

तेजेन्द्र शर्मा की कहानियों में बहुत ही ज्यादा जिंदगी से जुड़ी अपनी सी प्रतीत होती है उनके कहानियां अपना ममत्व, प्यार, दोस्ती का भाव बड़ी ही शिद्दत से महसूस किया जा सकता है, वो अपने पात्र को कहानी में बिल्कुल उतार ही देते हैं। हर पात्र अपने कहानी का कथ्य खुद कहता प्रतीत होता है। इनके सभी पात्र अपने आप ही बहुत ज्यादा अपने कहानी में अंत तक रहने पर मजबूर रहते हैं।

तो यहां तेजेन्द्र शर्मा की यह कहानी ‘खिड़की’ जिन्दगी को एक नये ढंग से जीने की प्रेरणा देती है कि आप जीवन में अपना कर्म भलीभांति करिए परिवार के प्रति पूरी सजगता से रहिए, बच्चों को उनके पैरों पर खड़े होने तक की जिम्मेदारी को पूरा करिए तथा फिर आप अपनी इच्छा शक्ति को कठोर करके अपनी जिंदगी को नये नजरिये से जीने के लिए तैयार रहिए। बच्चों के प्रति आशावादी मत बनिए, आप अपनी जिन्दगी से खुश रहना सीखिय

तेजेन्द्र शर्मा की कहानियों के कथानक विदेशों के अलावा दिल्ली मुंबई और लंदन शहरों से जुड़े हैं और कहानी भी लंदन के एक रेलवे स्टेशन की खिड़की की अपने एक दास्तां बयां करती है. इस तरह इस कहानी मे पहले जोपरिवार मे बुजुग एक बट वृक्ष की तरह होते थे, वह अब सिर्फ घरों में वोनसाई की तरह हो गये हैं। और देखने भर से घरों में सौंदर्य रूपी शो पीस बनकर रखे हैं। तथा कई घरों में यह है ही नहीं इस तरह से बुजुर्गों को या तो वृद्धा आश्रम में जगह है या फिर घरों में वोनसाई रूपी प्रतीकात्मक है।

आज जिस तरह घर परिवार बिखर रहे हैं उन सभी का महत्व इस कहानी खिड़की में प्रस्तुत है कि यहां स्थिति में एक तरह भारतीय संस्कृति के साथ वह अपनी उधेड़बुन में बैठी अपना काम पूरे शिहदत से कर रहे हैं। और वहीं बाहरी ओर खिड़की के कितनी तरह के संस्कृति से जुड़े लोग आते-जाते हैं और अपनी व्यथा को कहते सुनाते निकल जाते हैं।

इस कहानी में मानवीय संवेदना की गहराई को बहुत ही सुचारु रूप से समझा जा सकता है। इंसान कहीं भी रहे भावनाएं एक मनुष्य के मन में एक सी ही उभरती है चाहे वह विश्व के किसी भी कोने में रह रहा हो। इसी तरह यह ‘खिड़की’ कहानी एक अकेले वृद्धावस्था में जी रहे पात्र की है। जिसकी जिन्दगी में कोई भी गेनाय जीने के लिए नहीं है। और यह ब्रिटेन में रेलवे की नौकरी कर रहा है जो वहां की एक सी दिनचर्या एक ऊब पैदा करती है। और वह अपनी जिन्दगी में घुटन महसूस करता है अकेलापन उसे इस घुटन के कारण काटने को दौड़ता है। यह एक बृहद की मानसिक स्थिति को उजागर करती कहानी है। और यह जीवन मापन के लिए अपनी नौकरी का काम भी शिद्दत से करता है क्योंकि उसे अपनी जिन्दगी जीने के लिए आर्थिक संचय की जरूरत है। तो उसने अपनी रॉकी से ही अपनी जिन्दगी के उन पलों को जोड़ लिया है। और इन्हीं पलों के बीच एक उनकी सहभागी मित्र बन जाती है उसका नाम ‘कैसी ’ है वह भी जिंदगी में अकेली है। अपने बेटे को खोजती वहां पहुंचती है। इस तरह वह सभी अकेले एक सी मानसिकता के साथ …मित्र हैं। तप अपनी जिन्दगी को जीने की एक नया मुकाम तैयार करते है और एक दिन ‘कैसी से भी वहीं नायक कहता है कि तुम अपने लिए एक व्याय फ्रैंड ढूंढ लो अभी तुम्हारी उम्र ही क्या ह? बस यही लाईन ही

केसी के जीवन मैं एक नयी जिंदगी जीने की ललक पैदा होती है वह अब अपनी जिन्दगी जीने क़े एक ने मुकाम को महसूस करती है । वह कहती है की हम जी तो पहले भी रहे थे मगर अब वह वापस इंसान बन गए हैं और हम भी अपनी इस जिंदगी को एक नएपन से क्यों न जिए,फिर अब कैसी अपनी बालो को एक ने तरीके से बनाती है और फिर सभी एक नयी जिन्रदगी जीने लगते ह। और यही बदलाव इस कहानी का मूलभाव है यह बत्रिन और एक हिनुस्तानी संस्कृति को एक अलग ही ढंग से प्रस्तुत करने सछम है ,और इस तरह सभी साथी एक साथ अपने पन केलिए अपना जीवन जीने के लिए लोगो को प्रेणना देने मैं एक ओषधि का काम कर रही है,और सभी वह खिड़की के मित्र एक साथ हैं।

तेजेन्द्र शर्मा की कहानियां भारतीयता के साथ पाश्चात्य संस्कृति दोनों का परिचय मिलता है। इनकी सभी कहानियां किसी एक सीमित दायरे में कैद न रहकर अपने जीवन में हर एक नयेपन के साथ एक अलग ही ढंग में प्रस्तुत होती है।

इनकी सभी कहानियां शिल्प अनूठा व बेजोड़ है जो एक अपनी विशिष्ट कलात्मकता को लिए होती है। इनकी कहानी में सभी पात्र हमें वही अपने आस पास में ही और बहुत ही संवेदनात्मकता लिए दिखाई देते हैं।

विदेश में रहते हुए ओर उन्होंने ज्यादातर हवाई जहाज में नौकरी करने के कारण उन्हें रोज नये हालात, विभिन्न तरह के चरित्रें को बहुत ही पास से देखने-समझने का मौका मिला है। इस कारण इनकी कहानियां हर एक कहानी से एक नयापन लिये होती हैं। तथा सभी पात्रें ने बहुत ही मार्मिक क्षणों में अपने मन सच्चे रूप में जीते हुए प्रतीत हेाते हैं। सभी पात्र के अनुरूप पूर्णतः अपने करेक्टर में इसे जुड़े होते हैं।

तेजेन्द्र शर्मा जी स्वयं अपने संवेदनशील व्यक्तित्व के कारण ही सामान्य से अलग की तरह ही सभी घटनाओं को रेखांकित करने में सफल रहे हैं। और इन सभी घटनाक्रम को सिलसिलेवार ढंग से अपनी कहानियों में बयां करते हैं। खिड़की कहानी में अकेले वृद्धों की कहानी को कहकर तेजेन्द्र जी ने एक खिड़की का दर्द दोनों तरफ के भीतरी तथा बाहरी दोनों का बहुत ही सहज और दिलों में उथल पुथल मचाए। इस प्रकार बताया है क्यों आप इस इतनी बड़ी दुनिया में अकेलापन जिन्दगी का एक कठोर सत्या आप बुजुर्गों की बहुत ही बड़ी समस्या है। लेकिन यदि आप अपने आप जिन्दगी को जीना सीख ले तो कल आसान और हम जिन्दगी के करीब हो जाते हैं।

इसी तरह विदेशों में रह रहे बुजुर्गों को अकेलेपन को इस खिड़की कहानी के द्वारा तेजेन्द्र जी ने बहुत मार्मिकता क साथ बयां किया है। इसमें दो विभिन्न संस्कृतियों को बहुत ही सरल व प्यार के द्वारा एक दूसरे को समझकर वह अपने आप को एक साथ एक दूसरी क दुःख सुख क भागीदार बनकर सभीअपनी जिंदगी को मजेदार बन लेते हैं।और फिर वह सभी एक नए परिवार की तरह रेलवे के खिड़की में अपने आप को खड़ा पाते हैं। और इसके साथ ही यह कहानी एक अगली पीढ़ी को जिंदगी जीने का अच्छा सबक देती है।

तेजेन्द्र जी की‘खिड़की’ कहानी एक आज के समय के लिए नयीं सोच और एक नए तरीके से जिन्दगी जीने को प्रेरित करती है।आज हमें अपनी जिंदगी को ही महत्व देना है, और जब तक जीवन है हताश न होकर जिंदगी को बहुत ही खुशहाल जीने की सोच होनी है चाहिए और यही कारण है इनकी यह कहानी आज के सभी बुजुर्गों को यह प्ररेणा स्रोत बनी है। जिस तरह वह सभी रेलवे की खिड़की के सदस्य अंत में बच्चों की अपना बर्थडे मेकडॉनेड में सेलेब्रेट करते हैं। और अपनी नयी जिंदगी का जीने का मजा लेते हैं। और आज वह खिड़की सुबह सुबह बहुत ही आजाद और सवतंत्र मन से खुलत्ती है, और आज से यह उनकी जिंदगीके सोच की नयी सुबह होती है

मधु मेहता साथी

मुंबई,

+91 9920255866

 

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