Structure of Complex Verb in Hindi- Arun Kumar Pandey, Indra Kumar Pandey

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Abstract

प्रत्येक भाषा की अपनी एक व्यवस्था होती है तथा उसके अपने नियम होते हैं। इसीलिए वक्ता जो कुछ कहता है, श्रोता वही समझता है। भूतकाल का वाक्य भूतकाल का ही समझा जाता है, भविष्यकाल का नहीं। यह व्यवस्था ध्वनि, शब्द-रचना, वाक्य-रचना आदि सभी स्तरों पर होती है। किसी भी भाषा के आधारभूत वाक्य साँचों के निर्धारण में विशेष रूप से क्रिया ही वाक्य में आने वाले उद्देश्य (कर्ता, कर्म) एवं विधेय को नियंत्रित करती है। इस दृष्टि से कहा जा सकता है कि किसी भाषा विशेष में वाक्य-व्यवस्था को व्यवस्थित करने में क्रिया ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

Structure of Complex Verb in Hindi

   Arun Kumar Pandey                                                                           Indra Kumar Pandey

  (Ph.D Language Technology)                                                                   (Ph.D Language Technology)

   arunkpandey2@gmail.com                                                               indra.pandey280@gmail.com

शोध सारांश

प्रत्येक भाषा की अपनी एक व्यवस्था होती है तथा उसके अपने नियम होते हैं। इसीलिए वक्ता जो कुछ कहता है, श्रोता वही समझता है। भूतकाल का वाक्य भूतकाल का ही समझा जाता है, भविष्यकाल का नहीं। यह व्यवस्था ध्वनि, शब्द-रचना, वाक्य-रचना आदि सभी स्तरों पर होती है। किसी भी भाषा के आधारभूत वाक्य साँचों के निर्धारण में विशेष रूप से क्रिया ही वाक्य में आने वाले उद्देश्य (कर्ता, कर्म) एवं विधेय को नियंत्रित करती है। इस दृष्टि से कहा जा सकता है कि किसी भाषा विशेष में वाक्य-व्यवस्था को व्यवस्थित करने में क्रिया ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

बीज शब्द : भाषा, क्रिया, स्वरूप, व्यवस्था, वाक्य, रचना

 

शोध विस्तार

संप्रेषण की दृष्टि से भाषा की लघुतम इकाई तथा व्याकरण की दृष्टि से भाषा की महत्तम इकाई वाक्य है और किसी भी वाक्य का केंद्रीय तत्व उस वाक्य की क्रिया होती है। क्रिया के अभाव में वाक्य संरचना संभव नहीं है। अन्य शब्द या पदबंध तो क्रिया के साथ संयुक्त होकर ही वाक्य  में अपनी सार्थकता पाते हैं। क्रिया के होने से ही वाक्य का अर्थ स्पष्ट होता है, अतः किसी भी भाषा में क्रिया का विशेष महत्व है। क्रिया ही वाक्य में प्रयुक्त पदों की संख्या को नियंत्रित करती है।

   “कारक व्याकरण के अनुसार वाक्य एक क्रिया तथा एक से अधिक संज्ञा पदबंधों की ऐसी संरचना है, जिसमें प्रत्येक संज्ञा क्रिया के साथ एक विशेष कारक संबंध के अंतर्गत जुड़ी रहती है”।                                                                                                                 

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                                                                                                                                   (फिल्मोर, 1968)

इस सिद्धांत के अनुसार कहा जा सकता है कि वाक्य की मूल संरचना क्रिया पर निर्भर होती है।

प्रत्येक भाषा की अपनी एक व्यवस्था होती है तथा उसके अपने नियम होते हैं। इसीलिए वक्ता जो कुछ कहता है, श्रोता वही समझता है। भूतकाल का वाक्य भूतकाल का ही समझा जाता है, भविष्यकाल का नहीं। यह व्यवस्था ध्वनि, शब्द-रचना, वाक्य-रचना आदि सभी स्तरों पर होती है। उदाहरण के लिए- हिंदी में ड़, ढ़ शब्द के प्रारंभ में नहीं आते या ङ्, शब्द के आदि और अंत में नहीं आते। यह ध्वनि स्तर पर व्यवस्था है। वाक्य स्तर पर हिंदी में कर्ता + कर्म + क्रिया का क्रम होता है, किंतु अंग्रेजी में कर्ता + क्रिया + कर्म का। यह वाक्य स्तर पर व्यवस्था है।

 

किस भी भाषा के आधारभूत वाक्य साँचों के निर्धारण में विशेष रूप से क्रिया ही वाक्य में आने वाले उद्देश्य (कर्ता, कर्म) एवं विधेय को नियंत्रित करती है। इस दृष्टि से कहा जा सकता है कि किसी भाषा विशेष में वाक्य-व्यवस्था को व्यवस्थित करने में क्रिया ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

हिंदी के वाक्य विन्यास की दृष्टि से वाक्य में क्रिया की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। जैसे-

    राम ने रावण को मारा

    कर्ता      कर्म      क्रिया

इस वाक्य में क्रिया के बिना वाक्य पूरा नहीं हो सकता। अतः कहा जा सकता है कि वाक्य में क्रिया ही केंद्रक का कार्य करती है।

वाक्य में प्रयुक्त क्रिया पदबंध प्रायः दो घटकों से मिलकर बना होता है-

मुख्य क्रिया और सहायक क्रिया।

मुख्य क्रिया कोशीय अर्थ देती है और सहायक क्रिया व्याकरणिक अर्थ। मुख्य क्रिया के अंतर्गत सरल, मिश्र, यौगिक और संयुक्त क्रिया आते हैं और सहायक क्रिया काल, पक्ष, वृत्ति आदि की सूचना देती है।

क्रिया की परिभाषा -

“जिस विकारी शब्द के प्रयोग से हम किसी वस्तु के विषय में कुछ विधान करते हैं, उसे क्रिया कहते हैं। जैसे- हरीश भागा, राजा नगर में आया, मैं आऊँगा, घास हरी होती है।”[1]

“वाक्य में जिस शब्द के द्वारा किसी कार्य-व्यापार,गति, स्थिति अथवा अस्तित्व का बोध होता है, उसे क्रिया कहते हैं।“[2]

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जैसे-

            राम आम खाता है।

            लड़का पुस्तक पढ़ता है।

            वह घर जाएगा।

            वह पेड़ है।1

            ईश्वर है2

इन वाक्यों में खाता है, पढ़ता है (कार्य-व्यापार), जाएगा (गति), है1 (स्थिति),  है (अस्तित्व) आदि क्रियाएँ है।

उपर्युक्त परिभाषाओं से स्पष्ट है कि वाक्य में प्रयुक्त वह शब्द जिससे कार्य की स्थिति, करना या होना पता चले तथा किसी वस्तु, स्थान आदि के अस्तित्व या उपस्थिति होने का बोध हो, क्रिया कहलाता है। किसी भी वाक्य में क्रिया ही केंद्र में रहता है। क्रिया शब्द रूप अलग-अलग स्थितियों में परिवर्तित होता रहता है। उदाहरण- मैं आज दौड़ने गया, वे आज दौड़े, मैंने आज दौड़ा आदि।

 

 

 

संरचना के आधार पर क्रिया के चार प्रकार होते हैं-

  1. सरल क्रिया

     संरचना: वह घर जा रहा है.

मैं सोता हूँ.

  1. यौगिक क्रिया

     संरचना:मोहन चावल ले गया(ले+ जा+आ).

मैं पुस्तक रख गया(रख+ जा+आ).

  1. संयुक्त क्रिया

     संरचना:मोहन आ गया.

सीता ने रोटी खा ली(खा+ले+ई).

  1. मिश्र क्रिया:

“मिश्र क्रिया की संरचना में दो घटकों (संज्ञा अथवा विशेषण एवं क्रियांगी) के योग से होती  है. प्रथम घटक को क्रियामूल(Pre-Verb)एवं द्वितीय घटक को क्रियाकर (Verblizer)कहा गया है.”

जैसे- शादी करना,स्वीकार करना आदि.

                  मुख्यतःहिंदी के वाक्यों में तीन तरह की संरचना देखने को मिलती है-

  • संज्ञा+ क्रियाकर:

            इसके अंतर्गत पहला घटक संज्ञा(Noun) और दूसरा घटक क्रियाकर(Verblizer)होता है. जिसमें संज्ञा शब्द का संयोग कुछ अलग-अलग क्रियाकरों की सहायता से होकर मिश्र क्रिया बनाते हैं.

  • संज्ञा+ क्रियाकर संरचना

   उदाहरण:

  • NN+Verbalizer + AuxVerb.

वह उससे नफरत करती थी.

नफरत(NN)कर(Verbalizer)+ती थी (Aux Verb).

  • (VR+)=NN+ Verbalizer + AuxVerb.

2014-15 में केंद्र सरकार ने ट्रैक्स के बलबूते 1.3 लाख करोड़ रुपये की कमाई की  थी,

कमाई(VR+=NN) करना(Verbalizer)+ई थी(Aux Verb),

  • NN+Negation+Verbalizer + AuxVerb.

तुम उसकी बात मत करना.

बात(NN) मत(Negation) करना(Verbalizer).

  • NN+Question Word+( Negation)+Verbalizer + AuxVerb.

मुझे उसकी बात क्यों नहीं करनी चाहिए.

बात(NN)क्यों(Question Word) नहीं(Negation)करना(Verbalizer)+ ई चाहिए(Aux).    

  • कुछ भिन्न संरचनाएँ:
  • हमें बात(NN) उत्तर प्रदेश के मौखिक साहित्य पर करनी(Verbalizer)है।
  • विदेशी धरती से कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने जिस आरएसएस की तुलना(NN)मुस्लिम ब्रदरहुड से की(Verbalizer)थी।
  • विशेषण+क्रियाकर
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 इसके अंतर्गत पहला घटक विशेषण(Adjective) और दूसरा घटक क्रियाकर(Verblizer)होता है. जिसमेंविशेषण शब्द का संयोग कुछ अलग-अलग क्रियाकरों की सहायता से होकर मिश्र क्रिया बनाते हैं.

        विशेषण+ क्रियाकर  संरचना:  

        उदाहरण:

  • Adj+Verbalizer + Aux Verb.

          मैं आज अच्छे से स्पष्ट करना चाहती हूँ.

स्पष्ट(ADJ)करना(Verblizer) चाहती हूँ(AUX).

  • ADJ+Negation+Verbalizer + AuxVerb.

        अब मैं प्रमाणित नहीं करना चाहता हूँ.

प्रमाणित (ADJ)नहीं(Negation) करना(Verbalizer)चाहता हूँ(AUX).

  • ADJ+Question Word+( Negation)+Verbalizer + AuxVerb.
  • और Question Word + ADJ+( Negation)+Verbalizer + AuxVerb.
  • तुम प्रमाणित क्यों नहीं करना चाहता हूँ.

प्रमाणित (ADJ) क्यों(Questionword)नहीं(Negation) करना(Verbalizer)चाहता हूँ(AUX).

  • तुम क्या प्रमाणित नहीं करना चाहता हूँ.

क्या(Questionword)प्रमाणित (ADJ)नहीं(Negation) करना(Verbalizer)चाहता हूँ(AUX).

  • क्रियांगी + क्रियाकर : इसके अंतर्गत पहला घटक क्रियांगी(Adjective) और दूसरा घटक क्रियाकर(Verblizer)होता है.

 

 क्रियांगी + क्रियाकर  संरचना

  • क्रियांगी +Verbalizer + Aux

      तुम्हें  मेरी बात स्वीकार होनी चाहिए.

स्वीकार(क्रियांगी) होना(Verbalizer)+ई चाहिए(Aux)

  • क्रियांगी +Neg+Verbalizer + Aux Verb

           तुम्हें  मेरी बात स्वीकार नहीं होनी चाहिए.

स्वीकार(क्रियांगी) नहीं(Neg) होना(Verbalizer)+ई चाहिए(Aux)

  • क्रियांगी + Question Word+( Negation)+Verbalizer + AuxVerb

           तुम्हें  मेरी बात स्वीकार क्यों नहीं होनी चाहिए.

स्वीकार(क्रियांगी) क्यों(Qeword) नहीं(Neg) होना(Verbalizer)+ई चाहिए(Aux)

 

संदर्भ-सूची

  • सिंह, सूरजभान (2000) हिंदी का वाक्यात्मक व्याकरण. साहित्य सहकार, नई दिल्ली।
  • पाण्डेय, अनिल कुमार. (2010). हिंदी संरचना के विविध पक्ष.
  • गुरु, कामता प्रसाद (2010) हिंदी व्याकरण. प्रकाशक संस्थान, नई दिल्ली।
  • तरुण, हरिवंश (2009) मानक हिंदी व्याकरण और रचना. प्रकाशक संस्थान, नई दिल्ली।
  • सिंह, ब्रज किशोर प्रसाद (2010) सामान्य व्याकरण. भारत पुस्तक भंडार, नई दिल्ली।
  • Kacharu,Yamuna. (1980) Aspects of Hindi Grammar.
  • Kulkarni,Ambha. (2015) Agreement in Hindi Conjunct verb.(Research Paper)

[1]गुरु, कमाता प्रसाद. (2008). हिंदी व्याकरण. पृष्ठ- 103.

[2]पाण्डेय, अनिल कुमार. (2010). हिंदी संरचना के विविध पक्ष. पृष्ठ- 27.

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