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समकालीन साहित्य में आदिवासी समाज और संस्कृति का स्वरूप-चंदा

आदिवासी संस्कृति की प्राचीनता की बात करें तो यह आर्यों से पुरानी हैं जब आर्य भारत आए तो उन्होंने यहाँ के मूलनिवासी को खदेड़ दिया, आदिवासियों ने भी इसका प्रतिरोध किया, किन्तु पराजित होने के उपरांत भी उन्होंने आर्यों की अधीनता न स्वीकारते हुए घने जंगलों में शरण ली और वहीं अपनी सभ्यता और संस्कृति को जीवित रखा, बचाए रखा।

आदिवासी समाज, साहित्य एवं संस्कृति: वर्तमान चुनौतियाँ-शिलाची कुमारी

आदिवासी समाज, साहित्य एवं संस्कृति: वर्तमान चुनौतियाँ शिलाची कुमारी पीएच.ड़ी. शोधार्थीहिंदी विभागझारखंड केन्द्रीय विश्वविद्यालयShilachikandhway11@gmail.comMob: 8335878688 सारांश आदिवासी शब्द से ही पता चलता है आदिम युग की जाति– जंजातियाँ । जो अपनी सभ्यता और संस्कृति की धरोहर को युगों से सँजोये हुए हैं । वास्तव में ये राष्ट्र के असली वारिस कहे जा सकते हैं । …

मुख्यधारा का साहित्य और आदिवासी साहित्य की वैचारिकता-डॉ. अमित कुमार साह

मुख्यधारा का साहित्य और आदिवासी साहित्य की वैचारिकता डॉ. अमित कुमार साह,महद्दीपुर, खगड़िया, बिहारईमेल: amitsmith555@gmail.com शोध सारांश समकालीन हिन्दी साहित्य को अगर देखा जाय तो दो धाराओं को लेकर, दो विचारधाराओं को लेकर, दो समाज को लेकर लिखा जा रहा हैं। इसके बारें में यों कहे तो की हिन्दी साहित्य में समाज का यथार्थ का …

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