Showing 2 Result(s)
C:\Users\Hp\Desktop\img\images\thom-masat-h2ZTEoRz0wY-unsplash.jpg

रचनाएँ – ओमप्रकाश मुंडा

बेटी के कानों से दूर जिन दिनों लोग मेरी प्रेमिकाओं की भूमिका पर सवाल उठा रहे थे सवाल दर सवाल मेरी जिजीविषा कुंठित हो बन रही थी खोपड़ी पर नैतिकता का पहाड़ प्रेम की तो प्रेरणा मात्र है मनुष्य की देह ! कबीलाई सभ्यता में माँ और बेटे का जैविक संबंध विकास की प्रगतिशील परिभाषा …

कविता

पुरूषोत्तम व्यास की कविताएँ अघोषित युध्द…. कहाँ…कहाँ नही विचारों में चौराहों में हर नगर गांव की गलीयों में   बच नही पाता कोई न कोई बडे-बडे टेक न कोई मशीनगन फिर भी चल रहा अघोषित युध्द…    बोझा पहाड-सा इसको पकडू इसको जकडू नफरत फैलाने वाले आदोंलन…   अलग मैं मेरे विचार अलग मेरा झंडा …

error: कॉपी नहीं शेयर करें!!