ममता [कहानी]-डा. रतन कुमारी वर्मा

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नेहा की शादी थी। शादी में सभी लोग इकट्ठा हुए थे। सभी नात-बात एक दूसरे से बतियाने में मशगूल थे। नेहा के मामा ग्राम प्रधान थे। वह बोलेरो गाड़ी से चलते थे। क्षेत्र के विधायक मंत्री से उनके बहुत अच्छे सम्बन्ध थे। उन्होंने विधायक मंत्री जी को भी निमंत्रण दिया था। विधायक जी लखनऊ में बहुत अधिक व्यस्त थे। इसलिए विधायक जी की पत्नी मंत्राइन जी क्षेत्र में विवाह कार्यक्रम में शरीक होने अपने दल-बल के साथ पहुँची। नेहा के मामा मंत्राइन जी की खातिरदारी करने में व्यस्त हो गये। ग्रामीण राजनीति की पारखी कुछ महिलायें भी मंत्राइन जी के साथ लग लीं। वे बड़े सलीके से मंत्राइन जी को वर-वधू के स्टेज पर ले गयीं।

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हिंदी कहानी का नाट्य रूपांतरण – कथानक के स्तर पर: चंदन कुमार

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कहानियों में भाव बोध को अपनी भाव भंगिमा के साथ प्रस्तुत करना उसका नाट्य रूपांतरण है । विभिन्न प्रकार से घटना, कथा अथवा कहानी कहने की शैली रूपांतरण की जननी है । वर्तमान समय में रूपांतरण एक अनूठी कला की तरह है जो वर्तमान समय में खूब हो रहा है । कविताओं और कहानी का नाटक में, कहानी और नाटक का फिल्मों में रूपांतरण तेज़ी से हो रहा है । अभिव्यक्ति और कथानक को नए रूप में परिवर्तित कर के मंच पर लाया जा रहा है । ध्यातव्य हो कि एक विधा से दूसरी विधा में परिवर्तित होने पर भाषा, काल, दृश्य, संवाद भी बदल जाते हैं । यह बदलने के साथ मर्म को उसी अभिव्यक्ति से साथ प्रस्तुत करना ही नाट्य रूपांतरण को सही अर्थ देता है ।

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