तरक़्कीपसंद तहरीक और फ़ैज़ अहमद  फ़ैज़-अनिरुद्ध कुमार यादव

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तरक्क़ी पसंद तहरीक की स्थापना के साथ साहित्य समेत सभी क्षेत्रों में बदलाव के चिह्न दिखलाई पड़ते है।ये चिह्न कौन से थे इनकी पड़ताल की गई है साथ ही इन बिंदुओं पर फैज़ कितने खरे उतरते हैं इसको भी रेखांकित किया गया है। न सिर्फ उर्दू गजल गो बल्कि हिन्दी कवि में यह परिवर्तन कैसे आ रहा था और इनमें क्या समानता थी इसको भी उदाहरण सहित उदघाटित किया गया है।

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