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मानस की भाषिक पूर्वपीठिका के रूप में संस्कृत का अवदान: एक संक्षिप्त विवेचन-डॉ. के. आर महिया

मानस की भाषिक पूर्वपीठिका के रूप में संस्कृत का अवदान: एक संक्षिप्त विवेचन डॉ. के. आर महियासहायक आचार्य, संस्कृतराजकीय कन्या महाविद्यालय, अजमेरKrmahiya2027@gmail.com  शोध सार तुलसीदास निःसंदेह मध्ययुग की महत्त्वपूर्ण वैचारिक क्रांति की चरम परिणति थे परन्तु साथ ही उन्होंने जिन मूल्यों की स्थापना की वे आज भी मानव–समाज की मूल्य–रिक्तता को भरने में पूर्णरूपेण सक्षम …

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