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दलित महिला रचनाकारों की आत्मकथाओं में अभिव्यंजित व्यथा- विजयश्री सातपालकर

महिला आत्मकथाकारों में कौशल्या बैसंत्री की ‘दोहरा अभिशाप’ एवं सुशीला टाकभौरे की ‘शिकंजे का दर्द’ उल्लेखनीय है। पुरुष लेखक की तुलना में दलित लेखिकाओं की आत्मकथाएं उतनी मात्र में उपलब्ध नहीं है। भारतीय वर्ण व्यवस्था के तले दलित स्त्रियाँ ने मानसिक एवं शारीरिक पीड़ा की दोहरी मार सही है। प्रस्तुत लेख में कौशल्या बैसंत्री कृत ‘दोहरा अभिशाप’ और सुशीला टाकभौरे कृत ‘शिकंजे का दर्द’ आत्मकथाओं में अभिव्यक्त व्यथा का चित्रण किया गया है।

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