पीड़ा, आक्रोश और परिवर्तन का संकल्प-डॉ. रवि रंजन

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दलित तबके में आई जागृति ने उनमें सामाजिक-आर्थिक अन्याय को बनाए रखने वाले वर्ग और व्यवस्था के प्रति एक आलोचनात्मक दृष्टिकोण विकसित किया है। सामाजिक अन्याय के पक्षधरों और जिम्मेदार लोगों के प्रति दलितों का आक्रोश अब ज्यादा मुखर हो गया है। दलित मानस यातनाओं की आँच में तपा-झुलसा है अतः आक्रोश व प्रतिशोध के भाव अब इन कविताओं में आने लगे हैं।

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ओमप्रकाश वाल्मीकि की कहानियों में दलित जीवन का यथार्थ-डॉ. सुधांशु शर्मा

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Please share          ओमप्रकाश वाल्मीकि की कहानियों में दलित जीवन का यथार्थ                     डॉ. सुधांशु शर्मा                                कुम्हारिया, कांके             रांची, झारखंड                            8877541225    Sudhbharti@gmail.com शोध सारांश ओमप्रकाश वाल्मीकि

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