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person in facial paint and costume

भक्तिकालीन हिन्दी रंगमंच में परंपराशील नाट्य शैलियों का योगदान

लोकधर्मी नाटक जोकि नाट्यधर्मी परंपरा के समानांतर साधारण जनता द्वारा पोषित परंपरा जो प्राकृत और अपभ्रंश भाषाओं से गुजरती हुई विभिन्न देशी भाषाओं में अनेक लोक पारंपरिक शैलियों के रूप में प्रकट होती हैं ।

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