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क्रांति की अवधारणा और संबंधित साहित्य-सच्चिदानंद सिंह

प्रस्तुत शोध आलेख में क्रांति की अवधारण को स्पष्ट करते हुए बताया गया है कि क्रांति एक ऐसा परिवर्तन है जो कई रूपों में परिलक्षित होता है। एक तो यह चिंतन परंपरा में परिवर्तन के रूप में दिखता है (नवजागरण, ज्ञानोदय आदि), दूसरा सत्ता परिवर्तन जैसे फ्रांसीसी क्रांति, भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन, तीसरे प्रकार का परिवर्तन उत्पादन में तेजी से परिवर्तन (प्रक्रियागत परिवर्तन) के रूप में दिखाई पड़ता है जैसे औद्योगिक क्रांति।

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