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लघुकथा – झूठे रिश्ते: मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

लघुकथा – झूठे रिश्ते – मुकेश कुमार ऋषि वर्मा देर शाम तक मौसम रौद्ररुप दिखाता रहा। ओलों भरी बरसात ने मई के महीने को जनवरी जैसा ठण्डा बना दिया था। मौसम के इस बदलाव को रामेश्वर सहन नहीं कर पाये। रात बारह-एक बजे के बीच उनकी तबियत एकदम से बिगड़ गई। सर्दी-जुकाम ने उनके गले …

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