हिंदी की आरम्भिक आलोचना का विकास (तुलनात्मक आलोचना के विशेष संदर्भ में )-रवि कुमार

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स लेख में हिंदी की इसी आरम्भिक तुलनात्मक आलोचना के स्वरूप, बहसों, एक-दूसरे रचनाकार को बड़ा दिखने की प्रतिस्पर्धा और तुलनात्मक आलोचना के विकसित होने के कारण हिंदी आलोचना में आयी गिरावट को दिखाया गया है।

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