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गर्मियों में (व्यंग्य)-सुदर्शन वशिष्ठ

नीचे से आए लंबे तगड़े सेहतमंद लोग माल रोड पर घूमते हैं तो शिमला के लोग मरियल ट्टूओं की तरह इधर-उधर छिपते फिरते हैं. पड़ोसी राज्य लंबे तगड़े लोगों से भरे पड़े हैं. हालांकि यहां भी कहीं कहीं गांव में तगड़े लोग जा पाए जाते होंगे जैसे सिरमौर में ग्रेट खली अवतरित हुआ है. मगर वह एक अपवाद है.

आत्मनिर्भर-दिलीप तेतरवे

आत्मनिर्भर –दिलीप तेतरवे घोषणा सुनते ही रामा स्वावलम्बी चेरियन ने कहा- मुझे भी आत्मनिर्भर बनना है। वह बीते हुए दिनों की घटनाओं पर सोचने लगा, जिनका सम्बन्ध उससे, उसके गाँव और उसके देश से था-      -पिछली बार हमारे विधायक तांडेश्वरम् जी आए थे, हमारे गाँव को आत्मनिर्भर बनाने के लिए। थाना बनवा गए। सत्तर …

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