Showing 2 Result(s)

फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ का रिपोर्ताज ‘नेपाली क्रांति-कथा’ : स्पर्श-चाक्षुष-दृश्य बिंब की लय का बखान- अमरेन्द्र कुमार शर्मा

फनीश्वरनाथ ‘रेणु’ के रिपोर्ताज लेखन में ‘नेपाली क्रांति-कथा’ एक विशिष्ट रिपोर्ताज इस अर्थ में है कि नेपाली लोकतंत्र के एक ऐतिहासिक मोड़ को न केवल यह व्यक्त करता है बल्कि भारत के साथ उसके संबंध के सूत्र को भी विश्लेषित करता है. यह क्रांति-कथा लोकतंत्र की स्थापना के लिए अक्तूबर 1950 से मार्च 1951 के बीच छः महत्वपूर्ण तारीखों के बीच हिमालय की तराई में घटित होने वाली परिघटना का एक आख्यान रचती है.

क्रांति की अवधारणा और संबंधित साहित्य-सच्चिदानंद सिंह

प्रस्तुत शोध आलेख में क्रांति की अवधारण को स्पष्ट करते हुए बताया गया है कि क्रांति एक ऐसा परिवर्तन है जो कई रूपों में परिलक्षित होता है। एक तो यह चिंतन परंपरा में परिवर्तन के रूप में दिखता है (नवजागरण, ज्ञानोदय आदि), दूसरा सत्ता परिवर्तन जैसे फ्रांसीसी क्रांति, भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन, तीसरे प्रकार का परिवर्तन उत्पादन में तेजी से परिवर्तन (प्रक्रियागत परिवर्तन) के रूप में दिखाई पड़ता है जैसे औद्योगिक क्रांति।

error: कॉपी नहीं शेयर करें!!