वर्तमान सरकार के प्रति भारतीय मुसलमानों की राय विशेष संदर्भ: वाराणसी लोकसभा क्षेत्र-शुभम जायसवाल

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पिछले एक दशक से बाजार में स्मार्टफोन की बढ़ती बिक्री व सस्ती इन्टरनेट कि दरों के कारण भारतीय जनमानस का लगभग एक तिहाई हिस्सा इस तकनीक से जुड़ा हुआ है। फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप्प व यूट्यूब जैसे सोसल मीडिया एप्लीकेशन ने जनता को न केवल अपने आसपास कि जानकारी बल्कि देश-दुनिया की सरकार व उनके कामकाज के तरीकों से भी परिचत कराया, हालांकि यह पहुँच अब भी काफी असमान है। सोसल मीडिया कई लोगो के लिए प्रतिष्ठा का साधन है तो सामाजिक-आर्थिक संस्थाओं व राजनीतिक पार्टियों के लिए अपने प्रति आम जनता को जागरूक करने के साथ अपने हित से सम्बंधित चीजों के प्रति जनमत भी तैयार करने का एक साधन भी है। ऐसे में अतथ्यात्मक व भ्रामक सूचनाओं का भी प्रयोग कर एक-दुसरे के खिलाफ वैमनष्यता व हिंसा को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। ऐसे ही सूचनाओ के कारण ही हमें समाज में धर्म, जाती व समुदाय को आधार पर हिंसा की खबरे देखने व सुनने को मिल रही है। जिसमे भारतीय मुसलमानों के सामाजिक व राजनीतिक व्यवहार से जुड़े कई प्रकार के भ्रामक तथ्य भी शामिल है। परिणामस्वरूप भारतीय मुसलमान न केवल अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित है बल्कि उनके राष्ट्रवादी अस्मिता पर भी सवाल उठाये जा रहें है। प्रस्तुत शोध पत्र वाराणसी के मुसलमानों के राजनीतिक व्यवहार का अध्ययन है, जिसमे केंद्र में 2014 से भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद राजनीतिक फैसले व सरकार के प्रति उनकी राय शामिल है। 

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तबलीगी जमात और मुस्लिम महिलायें-अब्दुल अहद

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इस पेपर में हम देखेंगे कि तबलीगी ज़मात में मुस्लिम महिलाओं की क्या भूमिका थी। अर्थात हरियाणा के मेवात से 1920 के दशक में मौलाना मोहम्मद इलयास द्वारा जब यह आन्दोलन शुरू किया गया और धीरे-धीरे सम्पूर्ण भारत में फैल गया, तो इस कार्य में मुस्लिम महिलाएँ कहाँ तक सक्रिय थी। साथ ही उन्होंने इस्लाम के नियमों को जानने और उनको फैलाने में कहाँ तक अपना योगदान दिया। हम इस लेख में यह भी देखेंगे कि तबलीगी जमात की गतिविधियों के कारण मुस्लिम महिलाओं के जीवन में क्या बदलाव आये। इसके तहत  हम इस बिंदु का भी विशलेषण करेंगे कि तबलीगी जमात  पितृसत्ता, धर्म, जेंडर से किस तरह अन्तर्सम्बन्धित है।

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