आदिवासी सांस्कृतिक बोध और जीवन दर्शन-रविन्द्र कुमार मीना 

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किसी भी समाज के पास जीवन जीने की विशेष पद्धति होती है, जो उसे अन्य मानव समुदायों से अलग करती है । उसी संस्कृति और परंपरा का अनुसरण करते हुए वह समुदाय अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर होता है । यह विशेष जीवन शैली उसे अपने पूर्वजों से पारंपरिक रूप में प्राप्त होती है । जिसमें समय के साथ थोड़ा-बहुत परिवर्तन होता रहता है । आदिवासी जीवन शैली मानवीय संवेदनाओं एवं प्रकृति के सामंजस्य पर निर्भर रही है । इसलिए उसके दर्शन में समस्त संसार के उत्थान एवं प्रगति की भूमिका निहित है । वहां आत्म से अधिक महत्व सामुदायिकता को दिया जाता है । इसे आदिवासी दर्शन का सार तत्व भी कहा जाये तो कोई अतिश्योक्ति न होगी । क्योंकि आदिवासी दर्शन मनुष्य के श्रेष्ठ होने को अहं (घमंड) को खारिज करते हुए समस्त सृष्टि एवं प्रकृति के सहअस्तित्व को स्वीकार करता है ।

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